ऋग्वेद 10.135.6
यथाभ॑वदनु॒देयी॒ ततो॒ अग्र॑मजायत ।पु॒रस्ता॑द्बु॒ध्न आत॑तः प॒श्चान्नि॒रय॑णं कृ॒तम्॥
yathābhavadanudeyī tato agramajāyata |purastādbudhna ātataḥ paścānnirayaṇaṃ kṛtam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें