ऋग्वेद 10.14.14
य॒माय॑ घृ॒तव॑द्ध॒विर्जु॒होत॒ प्र च॑ तिष्ठत ।स नो॑ दे॒वेष्वा य॑मद्दी॒र्घमायु॒: प्र जी॒वसे॑॥
yamāya ghṛtavaddhavirjuhota pra ca tiṣṭhata |sa no deveṣvā yamaddīrghamāyu: pra jīvase ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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