ऋग्वेद 10.143.6
आ वां॑ सु॒म्नैः शं॒यू इ॑व॒ मंहि॑ष्ठा॒ विश्व॑वेदसा ।सम॒स्मे भू॑षतं न॒रोत्सं॒ न पि॒प्युषी॒रिष॑:॥
ā vāṃ sumnaiḥ śaṃyū iva maṃhiṣṭhā viśvavedasā |samasme bhūṣataṃ narotsaṃ na pipyuṣīriṣa: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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