ऋग्वेद 10.163.3
आ॒न्त्रेभ्य॑स्ते॒ गुदा॑भ्यो वनि॒ष्ठोर्हृद॑या॒दधि॑ ।यक्ष्मं॒ मत॑स्नाभ्यां य॒क्नः प्ला॒शिभ्यो॒ वि वृ॑हामि ते॥
āntrebhyaste gudābhyo vaniṣṭhorhṛdayādadhi |yakṣmaṃ matasnābhyāṃ yaknaḥ plāśibhyo vi vṛhāmi te ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें