ऋग्वेद 10.163.4
ऊ॒रुभ्यां॑ ते अष्ठी॒वद्भ्यां॒ पार्ष्णि॑भ्यां॒ प्रप॑दाभ्याम् ।यक्ष्मं॒ श्रोणि॑भ्यां॒ भास॑दा॒द्भंस॑सो॒ वि वृ॑हामि ते॥
ūrubhyāṃ te aṣṭhīvadbhyāṃ pārṣṇibhyāṃ prapadābhyām |yakṣmaṃ śroṇibhyāṃ bhāsadādbhaṃsaso vi vṛhāmi te ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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