ऋग्वेद 10.19.3
पुन॑रे॒ता नि व॑र्तन्ताम॒स्मिन्पु॑ष्यन्तु॒ गोप॑तौ ।इ॒हैवाग्ने॒ नि धा॑रये॒ह ति॑ष्ठतु॒ या र॒यिः॥
punaretā ni vartantāmasminpuṣyantu gopatau |ihaivāgne ni dhārayeha tiṣṭhatu yā rayiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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