ऋग्वेद 10.19.5
य उ॒दान॒ड्व्यय॑नं॒ य उ॒दान॑ट् प॒राय॑णम् ।आ॒वर्त॑नं नि॒वर्त॑न॒मपि॑ गो॒पा नि व॑र्तताम्॥
ya udānaḍvyayanaṃ ya udānaṭ parāyaṇam |āvartanaṃ nivartanamapi gopā ni vartatām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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