ऋग्वेद 10.19.7
परि॑ वो वि॒श्वतो॑ दध ऊ॒र्जा घृ॒तेन॒ पय॑सा ।ये दे॒वाः के च॑ य॒ज्ञिया॒स्ते र॒य्या सं सृ॑जन्तु नः॥
pari vo viśvato dadha ūrjā ghṛtena payasā |ye devāḥ ke ca yajñiyāste rayyā saṃ sṛjantu naḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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