ऋग्वेद 10.27.18
वि क्रो॑श॒नासो॒ विष्व॑ञ्च आय॒न्पचा॑ति॒ नेमो॑ न॒हि पक्ष॑द॒र्धः ।अ॒यं मे॑ दे॒वः स॑वि॒ता तदा॑ह॒ द्र्व॑न्न॒ इद्व॑नवत्स॒र्पिर॑न्नः॥
vi krośanāso viṣvañca āyanpacāti nemo nahi pakṣadardhaḥ |ayaṃ me devaḥ savitā tadāha drvanna idvanavatsarpirannaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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