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ऋग्वेद 10.60.3
यो जना॑न्महि॒षाँ इ॑वाऽतित॒स्थौ पवी॑रवान् ।उ॒ताप॑वीरवान्यु॒धा॥
yo janānmahiṣām̐ ivā'titasthau pavīravān |utāpavīravānyudhā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंयो जना॑न्महि॒षाँ इ॑वाऽतित॒स्थौ पवी॑रवान् ।उ॒ताप॑वीरवान्यु॒धा॥
yo janānmahiṣām̐ ivā'titasthau pavīravān |utāpavīravānyudhā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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