ऋग्वेद 10.61.11
म॒क्षू क॒नाया॑: स॒ख्यं नवी॑यो॒ राधो॒ न रेत॑ ऋ॒तमित्तु॑रण्यन् ।शुचि॒ यत्ते॒ रेक्ण॒ आय॑जन्त सब॒र्दुघा॑या॒: पय॑ उ॒स्रिया॑याः॥
makṣū kanāyā: sakhyaṃ navīyo rādho na reta ṛtamitturaṇyan |śuci yatte rekṇa āyajanta sabardughāyā: paya usriyāyāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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