ऋग्वेद 10.93.3
विश्वे॑षामिरज्यवो दे॒वानां॒ वार्म॒हः ।विश्वे॒ हि वि॒श्वम॑हसो॒ विश्वे॑ य॒ज्ञेषु॑ य॒ज्ञिया॑:॥
viśveṣāmirajyavo devānāṃ vārmahaḥ |viśve hi viśvamahaso viśve yajñeṣu yajñiyā: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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