ऋग्वेद 10.93.4
ते घा॒ राजा॑नो अ॒मृत॑स्य म॒न्द्रा अ॑र्य॒मा मि॒त्रो वरु॑ण॒: परि॑ज्मा ।कद्रु॒द्रो नृ॒णां स्तु॒तो म॒रुत॑: पू॒षणो॒ भग॑:॥
te ghā rājāno amṛtasya mandrā aryamā mitro varuṇa: parijmā |kadrudro nṛṇāṃ stuto maruta: pūṣaṇo bhaga: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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