ऋग्वेद 10.95.15
पुरू॑रवो॒ मा मृ॑था॒ मा प्र प॑प्तो॒ मा त्वा॒ वृका॑सो॒ अशि॑वास उ क्षन् ।न वै स्त्रैणा॑नि स॒ख्यानि॑ सन्ति सालावृ॒काणां॒ हृद॑यान्ये॒ता॥
purūravo mā mṛthā mā pra papto mā tvā vṛkāso aśivāsa u kṣan |na vai straiṇāni sakhyāni santi sālāvṛkāṇāṃ hṛdayānyetā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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