Loading
ऋग्वेद 3.27.14
वृषो॑ अ॒ग्निः समि॑ध्य॒तेऽश्वो॒ न दे॑व॒वाह॑नः ।तं ह॒विष्म॑न्त ईळते॥
vṛṣo agniḥ samidhyate'śvo na devavāhanaḥ |taṃ haviṣmanta īḷate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंवृषो॑ अ॒ग्निः समि॑ध्य॒तेऽश्वो॒ न दे॑व॒वाह॑नः ।तं ह॒विष्म॑न्त ईळते॥
vṛṣo agniḥ samidhyate'śvo na devavāhanaḥ |taṃ haviṣmanta īḷate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें