ऋग्वेद 3.33.13
उद् व॑ ऊ॒र्मिः शम्या॑ ह॒न्त्वापो॒ योक्त्रा॑णि मुञ्चत ।मादु॑ष्कृतौ॒ व्ये॑नसा॒ ऽघ्न्यौ शून॒मार॑ताम्॥
ud va ūrmiḥ śamyā hantvāpo yoktrāṇi muñcata |māduṣkṛtau vyenasā 'ghnyau śūnamāratām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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