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ऋग्वेद 3.41.4
रा॒र॒न्धि सव॑नेषु ण ए॒षु स्तोमे॑षु वृत्रहन् ।उ॒क्थेष्वि॑न्द्र गिर्वणः॥
rārandhi savaneṣu ṇa eṣu stomeṣu vṛtrahan |uktheṣvindra girvaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंरा॒र॒न्धि सव॑नेषु ण ए॒षु स्तोमे॑षु वृत्रहन् ।उ॒क्थेष्वि॑न्द्र गिर्वणः॥
rārandhi savaneṣu ṇa eṣu stomeṣu vṛtrahan |uktheṣvindra girvaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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