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ऋग्वेद 3.41.7
व॒यमि॑न्द्र त्वा॒यवो॑ ह॒विष्म॑न्तो जरामहे ।उ॒त त्वम॑स्म॒युर्व॑सो॥
vayamindra tvāyavo haviṣmanto jarāmahe |uta tvamasmayurvaso ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंव॒यमि॑न्द्र त्वा॒यवो॑ ह॒विष्म॑न्तो जरामहे ।उ॒त त्वम॑स्म॒युर्व॑सो॥
vayamindra tvāyavo haviṣmanto jarāmahe |uta tvamasmayurvaso ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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