ऋग्वेद 3.8.7
ये वृ॒क्णासो॒ अधि॒ क्षमि॒ निमि॑तासो य॒तस्रु॑चः ।ते नो॑ व्यन्तु॒ वार्यं॑ देव॒त्रा क्षे॑त्र॒साध॑सः॥
ye vṛkṇāso adhi kṣami nimitāso yatasrucaḥ |te no vyantu vāryaṃ devatrā kṣetrasādhasaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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