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ऋग्वेद 4.17.15
असि॑क्न्यां॒ यज॑मानो॒ न होता॑॥
asiknyāṃ yajamāno na hotā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअसि॑क्न्यां॒ यज॑मानो॒ न होता॑॥
asiknyāṃ yajamāno na hotā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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