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ऋग्वेद 4.30.11
ए॒तद॑स्या॒ अन॑: शये॒ सुस॑म्पिष्टं॒ विपा॒श्या ।स॒सार॑ सीं परा॒वत॑:॥
etadasyā ana: śaye susampiṣṭaṃ vipāśyā |sasāra sīṃ parāvata: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंए॒तद॑स्या॒ अन॑: शये॒ सुस॑म्पिष्टं॒ विपा॒श्या ।स॒सार॑ सीं परा॒वत॑:॥
etadasyā ana: śaye susampiṣṭaṃ vipāśyā |sasāra sīṃ parāvata: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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