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ऋग्वेद 5.31.9
इन्द्रा॑कुत्सा॒ वह॑माना॒ रथे॒नाऽऽ वा॒मत्या॒ अपि॒ कर्णे॑ वहन्तु ।निः षी॑म॒द्भ्यो धम॑थो॒ निः ष॒धस्था॑न् म॒घोनो॑ हृ॒दो व॑रथ॒स्तमां॑सि॥
indrākutsā vahamānā rathenā'' vāmatyā api karṇe vahantu |niḥ ṣīmadbhyo dhamatho niḥ ṣadhasthān maghono hṛdo varathastamāṃsi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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