ऋग्वेद 5.41.11
॥क॒था म॒हे रु॒द्रिया॑य ब्रवाम॒ कद्रा॒ये चि॑कि॒तुषे॒ भगा॑य ।आप॒ ओष॑धीरु॒त नो॑ऽवन्तु॒ द्यौर्वना॑ गि॒रयो॑ वृ॒क्षके॑शाः॥
||kathā mahe rudriyāya bravāma kadrāye cikituṣe bhagāya |āpa oṣadhīruta no'vantu dyaurvanā girayo vṛkṣakeśāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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