ऋग्वेद 5.51.7
सु॒ता इन्द्रा॑य वा॒यवे॒ सोमा॑सो॒ दध्या॑शिरः ।नि॒म्नं न य॑न्ति॒ सिन्ध॑वो॒ऽभि प्रय॑:॥
sutā indrāya vāyave somāso dadhyāśiraḥ |nimnaṃ na yanti sindhavo'bhi praya: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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