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ऋग्वेद 5.61.15
यू॒यं मर्तं॑ विपन्यवः प्रणे॒तार॑ इ॒त्था धि॒या ।श्रोता॑रो॒ याम॑हूतिषु॥
yūyaṃ martaṃ vipanyavaḥ praṇetāra itthā dhiyā |śrotāro yāmahūtiṣu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंयू॒यं मर्तं॑ विपन्यवः प्रणे॒तार॑ इ॒त्था धि॒या ।श्रोता॑रो॒ याम॑हूतिषु॥
yūyaṃ martaṃ vipanyavaḥ praṇetāra itthā dhiyā |śrotāro yāmahūtiṣu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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