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ऋग्वेद 6.45.23
न घा॒ वसु॒र्नि य॑मते दा॒नं वाज॑स्य॒ गोम॑तः ।यत्सी॒मुप॒ श्रव॒द्गिर॑:॥
na ghā vasurni yamate dānaṃ vājasya gomataḥ |yatsīmupa śravadgira: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंन घा॒ वसु॒र्नि य॑मते दा॒नं वाज॑स्य॒ गोम॑तः ।यत्सी॒मुप॒ श्रव॒द्गिर॑:॥
na ghā vasurni yamate dānaṃ vājasya gomataḥ |yatsīmupa śravadgira: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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