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ऋग्वेद 6.45.31
अधि॑ बृ॒बुः प॑णी॒नां वर्षि॑ष्ठे मू॒र्धन्न॑स्थात् ।उ॒रुः कक्षो॒ न गा॒ङ्ग्यः॥
adhi bṛbuḥ paṇīnāṃ varṣiṣṭhe mūrdhannasthāt |uruḥ kakṣo na gāṅgyaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअधि॑ बृ॒बुः प॑णी॒नां वर्षि॑ष्ठे मू॒र्धन्न॑स्थात् ।उ॒रुः कक्षो॒ न गा॒ङ्ग्यः॥
adhi bṛbuḥ paṇīnāṃ varṣiṣṭhe mūrdhannasthāt |uruḥ kakṣo na gāṅgyaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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