ऋग्वेद 6.47.15
क ईं॑ स्तव॒त्कः पृ॑णा॒त्को य॑जाते॒ यदु॒ग्रमिन्म॒घवा॑ वि॒श्वहावे॑त् ।पादा॑विव प्र॒हर॑न्न॒न्यम॑न्यं कृ॒णोति॒ पूर्व॒मप॑रं॒ शची॑भिः॥
ka īṃ stavatkaḥ pṛṇātko yajāte yadugraminmaghavā viśvahāvet |pādāviva praharannanyamanyaṃ kṛṇoti pūrvamaparaṃ śacībhiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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