ऋग्वेद 6.51.12
नू स॒द्मानं॑ दि॒व्यं नंशि॑ देवा॒ भार॑द्वाजः सुम॒तिं या॑ति॒ होता॑ ।आ॒सा॒नेभि॒र्यज॑मानो मि॒येधै॑र्दे॒वानां॒ जन्म॑ वसू॒युर्व॑वन्द॥
nū sadmānaṃ divyaṃ naṃśi devā bhāradvājaḥ sumatiṃ yāti hotā |āsānebhiryajamāno miyedhairdevānāṃ janma vasūyurvavanda ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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