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ऋग्वेद 6.54.10
परि॑ पू॒षा प॒रस्ता॒द्धस्तं॑ दधातु॒ दक्षि॑णम् ।पुन॑र्नो न॒ष्टमाज॑तु॥
pari pūṣā parastāddhastaṃ dadhātu dakṣiṇam |punarno naṣṭamājatu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंपरि॑ पू॒षा प॒रस्ता॒द्धस्तं॑ दधातु॒ दक्षि॑णम् ।पुन॑र्नो न॒ष्टमाज॑तु॥
pari pūṣā parastāddhastaṃ dadhātu dakṣiṇam |punarno naṣṭamājatu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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