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ऋग्वेद 6.60.12
ता नो॒ वाज॑वती॒रिष॑ आ॒शून्पि॑पृत॒मर्व॑तः ।इन्द्र॑म॒ग्निं च॒ वोळ्ह॑वे॥
tā no vājavatīriṣa āśūnpipṛtamarvataḥ |indramagniṃ ca voḷhave ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंता नो॒ वाज॑वती॒रिष॑ आ॒शून्पि॑पृत॒मर्व॑तः ।इन्द्र॑म॒ग्निं च॒ वोळ्ह॑वे॥
tā no vājavatīriṣa āśūnpipṛtamarvataḥ |indramagniṃ ca voḷhave ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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