ऋग्वेद 6.62.8
यद्रो॑दसी प्र॒दिवो॒ अस्ति॒ भूमा॒ हेळो॑ दे॒वाना॑मु॒त म॑र्त्य॒त्रा ।तदा॑दित्या वसवो रुद्रियासो रक्षो॒युजे॒ तपु॑र॒घं द॑धात॥
yadrodasī pradivo asti bhūmā heḷo devānāmuta martyatrā |tadādityā vasavo rudriyāso rakṣoyuje tapuraghaṃ dadhāta ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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