ऋग्वेद 6.75.13
आ ज॑ङ्घन्ति॒ सान्वे॑षां ज॒घनाँ॒ उप॑ जिघ्नते ।अश्वा॑जनि॒ प्रचे॑त॒सोऽश्वा॑न्त्स॒मत्सु॑ चोदय॥
ā jaṅghanti sānveṣāṃ jaghanām̐ upa jighnate |aśvājani pracetaso'śvāntsamatsu codaya ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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