ऋग्वेद 6.75.15
आला॑क्ता॒ या रुरु॑शी॒र्ष्ण्यथो॒ यस्या॒ अयो॒ मुख॑म् ।इ॒दं प॒र्जन्य॑रेतस॒ इष्वै॑ दे॒व्यै बृ॒हन्नम॑:॥
ālāktā yā ruruśīrṣṇyatho yasyā ayo mukham |idaṃ parjanyaretasa iṣvai devyai bṛhannama: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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