ऋग्वेद 7.32.11
गम॒द्वाजं॑ वा॒जय॑न्निन्द्र॒ मर्त्यो॒ यस्य॒ त्वम॑वि॒ता भुव॑: ।अ॒स्माकं॑ बोध्यवि॒ता रथा॑नाम॒स्माकं॑ शूर नृ॒णाम्॥
gamadvājaṃ vājayannindra martyo yasya tvamavitā bhuva: |asmākaṃ bodhyavitā rathānāmasmākaṃ śūra nṛṇām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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