ऋग्वेद 7.32.20
त॒रणि॒रित्सि॑षासति॒ वाजं॒ पुरं॑ध्या यु॒जा ।आ व॒ इन्द्रं॑ पुरुहू॒तं न॑मे गि॒रा ने॒मिं तष्टे॑व सु॒द्र्व॑म्॥
taraṇiritsiṣāsati vājaṃ puraṃdhyā yujā |ā va indraṃ puruhūtaṃ name girā nemiṃ taṣṭeva sudrvam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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