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ऋग्वेद 7.34.12
अवि॑ष्टो अ॒स्मान्विश्वा॑सु वि॒क्ष्वद्युं॑ कृणोत॒ शंसं॑ निनि॒त्सोः॥
aviṣṭo asmānviśvāsu vikṣvadyuṃ kṛṇota śaṃsaṃ ninitsoḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअवि॑ष्टो अ॒स्मान्विश्वा॑सु वि॒क्ष्वद्युं॑ कृणोत॒ शंसं॑ निनि॒त्सोः॥
aviṣṭo asmānviśvāsu vikṣvadyuṃ kṛṇota śaṃsaṃ ninitsoḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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