Loading
ऋग्वेद 7.34.16
अ॒ब्जामु॒क्थैरहिं॑ गृणीषे बु॒ध्ने न॒दीनां॒ रज॑: सु॒ षीद॑न्॥
abjāmukthairahiṃ gṛṇīṣe budhne nadīnāṃ raja: su ṣīdan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअ॒ब्जामु॒क्थैरहिं॑ गृणीषे बु॒ध्ने न॒दीनां॒ रज॑: सु॒ षीद॑न्॥
abjāmukthairahiṃ gṛṇīṣe budhne nadīnāṃ raja: su ṣīdan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें