ऋग्वेद 8.12.26
य॒दा वृ॒त्रं न॑दी॒वृतं॒ शव॑सा वज्रि॒न्नव॑धीः ।आदित्ते॑ हर्य॒ता हरी॑ ववक्षतुः॥
yadā vṛtraṃ nadīvṛtaṃ śavasā vajrinnavadhīḥ |āditte haryatā harī vavakṣatuḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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