ऋग्वेद 8.12.8
यदि॑ प्रवृद्ध सत्पते स॒हस्रं॑ महि॒षाँ अघ॑: ।आदित्त॑ इन्द्रि॒यं महि॒ प्र वा॑वृधे॥
yadi pravṛddha satpate sahasraṃ mahiṣām̐ agha: |āditta indriyaṃ mahi pra vāvṛdhe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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