ऋग्वेद 8.15.11
स॒त्रा त्वं पु॑रुष्टुतँ॒ एको॑ वृ॒त्राणि॑ तोशसे ।नान्य इन्द्रा॒त्कर॑णं॒ भूय॑ इन्वति॥
satrā tvaṃ puruṣṭutam̐ eko vṛtrāṇi tośase |nānya indrātkaraṇaṃ bhūya invati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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