ऋग्वेद 8.20.8
गोभि॑र्वा॒णो अ॑ज्यते॒ सोभ॑रीणां॒ रथे॒ कोशे॑ हिर॒ण्यये॑ ।गोब॑न्धवः सुजा॒तास॑ इ॒षे भु॒जे म॒हान्तो॑ न॒: स्पर॑से॒ नु॥
gobhirvāṇo ajyate sobharīṇāṃ rathe kośe hiraṇyaye |gobandhavaḥ sujātāsa iṣe bhuje mahānto na: sparase nu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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