ऋग्वेद 8.33.17इन्द्र॑श्चिद्घा॒ तद॑ब्रवीत्स्त्रि॒या अ॑शा॒स्यं मन॑: ।उ॒तो अह॒ क्रतुं॑ र॒घुम्॥indraścidghā tadabravītstriyā aśāsyaṃ mana: |uto aha kratuṃ raghum ||इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें