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ऋग्वेद 8.33.18
सप्ती॑ चिद्घा मद॒च्युता॑ मिथु॒ना व॑हतो॒ रथ॑म् ।ए॒वेद्धूर्वृष्ण॒ उत्त॑रा॥
saptī cidghā madacyutā mithunā vahato ratham |eveddhūrvṛṣṇa uttarā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंसप्ती॑ चिद्घा मद॒च्युता॑ मिथु॒ना व॑हतो॒ रथ॑म् ।ए॒वेद्धूर्वृष्ण॒ उत्त॑रा॥
saptī cidghā madacyutā mithunā vahato ratham |eveddhūrvṛṣṇa uttarā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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