ऋग्वेद 8.33.19
अ॒धः प॑श्यस्व॒ मोपरि॑ संत॒रां पा॑द॒कौ ह॑र ।मा ते॑ कशप्ल॒कौ दृ॑श॒न्त्स्त्री हि ब्र॒ह्मा ब॒भूवि॑थ॥
adhaḥ paśyasva mopari saṃtarāṃ pādakau hara |mā te kaśaplakau dṛśantstrī hi brahmā babhūvitha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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