ऋग्वेद 8.34.15
आ न॑: सहस्र॒शो भ॑रा॒ऽयुता॑नि श॒तानि॑ च ।दि॒वो अ॒मुष्य॒ शास॑तो॒ दिवं॑ य॒य दि॑वावसो॥
ā na: sahasraśo bharā'yutāni śatāni ca |divo amuṣya śāsato divaṃ yaya divāvaso ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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