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ऋग्वेद 8.43.21
पु॒रु॒त्रा हि स॒दृङ्ङसि॒ विशो॒ विश्वा॒ अनु॑ प्र॒भुः ।स॒मत्सु॑ त्वा हवामहे॥
purutrā hi sadṛṅṅasi viśo viśvā anu prabhuḥ |samatsu tvā havāmahe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंपु॒रु॒त्रा हि स॒दृङ्ङसि॒ विशो॒ विश्वा॒ अनु॑ प्र॒भुः ।स॒मत्सु॑ त्वा हवामहे॥
purutrā hi sadṛṅṅasi viśo viśvā anu prabhuḥ |samatsu tvā havāmahe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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