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ऋग्वेद 8.44.10
विप्रं॒ होता॑रम॒द्रुहं॑ धू॒मके॑तुं वि॒भाव॑सुम् ।य॒ज्ञानां॑ के॒तुमी॑महे॥
vipraṃ hotāramadruhaṃ dhūmaketuṃ vibhāvasum |yajñānāṃ ketumīmahe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंविप्रं॒ होता॑रम॒द्रुहं॑ धू॒मके॑तुं वि॒भाव॑सुम् ।य॒ज्ञानां॑ के॒तुमी॑महे॥
vipraṃ hotāramadruhaṃ dhūmaketuṃ vibhāvasum |yajñānāṃ ketumīmahe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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