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ऋग्वेद 8.44.15
यो अ॒ग्निं त॒न्वो॒३ दमे॑ दे॒वं मर्त॑: सप॒र्यति॑ ।तस्मा॒ इद्दी॑दय॒द्वसु॑॥
yo agniṃ tanvo3 dame devaṃ marta: saparyati |tasmā iddīdayadvasu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंयो अ॒ग्निं त॒न्वो॒३ दमे॑ दे॒वं मर्त॑: सप॒र्यति॑ ।तस्मा॒ इद्दी॑दय॒द्वसु॑॥
yo agniṃ tanvo3 dame devaṃ marta: saparyati |tasmā iddīdayadvasu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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