ऋग्वेद 8.44.19त्वाम॑ग्ने मनी॒षिण॒स्त्वां हि॑न्वन्ति॒ चित्ति॑भिः ।त्वां व॑र्धन्तु नो॒ गिर॑:॥tvāmagne manīṣiṇastvāṃ hinvanti cittibhiḥ |tvāṃ vardhantu no gira: ||इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें